Thursday, September 30, 2010

अयोध्या - बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक़...!

HTML Code आज दोपहर 3.30 pm पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के चलते इलाहाबाद हाई कोर्ट 
की लखनऊ खंड पीठ का अयोध्या - बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक़ को लेकर तमाम तरह से लोग और समाज से जुड़े हुए हर 
वर्ग का आदमी अपने - अपने शांति,अमन के शंदेशो से आम जनता को पूरी शिदत से इस फैसले का सम्मान करने की हिदायत सी 
दे रहा है उधर मीडिया भी अपनी सकारात्मक भूमिका के साथ लगा है मगर जाने अनजाने ही सही हमसे गलतिय हो ही जाती है जैसा की जनपद बांदा - चित्रकूट की खबर में हुआ, पेज ६ पर अमर उजाला ने अमन चैन की जो आज खबर लिखी उसमे बुंदेलखंड के समाज सेवी श्री गोपाल भाई के जन सन्देश पर शहर के ही श्री वीरेन्द्र दिवेदी का शंदेश लग गया वो भी उनकी फोटो के साथ 
अब एक समाज सेवी के पैगाम और राजनितिक आदमी की बाटो में मूल का अंतर तो होगा ही झा एक समाज सेवी कहता है की सारा देश एक है , सभी का पोषण हो , सबको संसाधन मिले वही राजनितिक लोगो से न्याय पालिका और प्रजातान्त्रिक 
जैसे शब्दों की वकालत करता हुआ नज़र आया हमारे कहने का ये ही आशय है की जन शंदेश ही किसी की छवि का एक मात्रा दर्पण होता है इसलिए मीडिया को भी इस तरह की बुनियादी बाटो को ख्याल करते हुए खबर लिखनी चाहिए , आज का फैसला जो भी हो या जिसके भी पाले में हो हमें जाति, धर्म , वर्ग के नाम पर कोई नहीं बात पायेगा ये नेता भी नहीं आखिर सामाजिक मुदा तो एक मंदिर - मस्जिद के बंनने या न बनने का नहीं देश को पूरी तरह गरीबी , कुपोषण , बेकारी , धार्मिक आतंकवाद से बचाकर स्थाई विकास के रास्तो पर ले जाने का है जैसा की माननीय कलम जी ने सोचा है - " मंदिर टूटे या मस्जिद , न टूटे गा  अमन हमारा , एक दूजे पे चढ़ जायेगा कफ़न हमारा " 

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