Thursday, September 22, 2016

हरपालपुर- महोबा रेल मार्ग पर नवजात बेटी को फेंका

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छतरपुर / महोबा / बुंदेलखंड - 
मांस का लोथड़ा बनकर रही गई ममता !
जहाँ बेटियां रेलवे ट्रैक पर मरती हो वहाँ कैसा बेटी बचाओ अभियान !!
' धर्म में यूँ तो बेटियां पूजने के काबिल है, 
लेकिन असल में हम उनके कातिल है ! 
कन्या भोज,मान्यता और अन्य सरकारी योजना पर ये सवाल है, 
कि आखिर कौन माँ-बाप बेटी का हलाल है ? '

छतरपुर -महोबा साथी सुनील रिछारिया के अनुसार आज गुरुवार 22 सितम्बर सुबह 9 बजे के करीब हरपालपुर रेलवे स्टेशन से करीब पांच किलोमीटर दूर पोल संख्या 1214 /3/4 रेल्वे लाईन के बीच एक नवजात बच्ची का शव गैनमैन को पड़ा मिला !नवज़ात के शव की हालात देख का लग रहा था कि किसी बेटी को महिला के द्वारा चलती ट्रेन से फैंका गया है ! इस घटना की जानकारी स्टेशन प्रबंधक को दी गई. स्टेशन प्रबंधक ने नवजात के शव मिलने की सूचना हरपालपुर थाना पुलिस को दी . तब मौके पर पहुँची थाना पुलिस ने मासूम के इस ह्रदय विदारक घटनाक्रम को आला अधिकारीयों तक पहुँचाया है ! 
गौरतलब है यह बुंदेलखंड से पिछड़े क्षेत्र की खबर है जब यहाँ ऐसा हो रहा है तो बड़े शहरों में क्या नहीं होता होगा ये सोचने की बात है ! आने वाले नवरात्री के माह में कन्या भोज करवाने वाले उन छद्म धार्मिक लोगों को इस तस्वीर को देखना चाहिए कि जिंदा बेटियां माँ और हम रेलवे ट्रैक पर फेंकते है और बेटी को अपने सामाजिक प्रचार के लिए पूजने का तमाशा भी करते है ! सरकारी योजनाओं का प्रचार - प्रसार आम नागरिक की मनोदशा कितना बदल सका है बेटी के जन्म के प्रति यह बतलाने की आवश्यकता नहीं है ! यह भी सत्य है कि बच्ची को उसके चिर परिचित / माँ ने ही रेलवे ट्रैक पर फेंका कूड़ा समझकर धिक्कार है ऐसी ममता पर और लानत भी मानवता के इस विद्रूप चेहरे में ! काश माँ इतनी जाहिल और पिता बोझिल न हो ! जानवर /बन्दर भी अपने मृतक बच्चो को कई दिन तक सीने में चिपकाये घूमते है हमने तो उन्हें भी पीछे छोड़ा है !
#PMOMODI #MPUPCM

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