Saturday, September 24, 2016

डकैतों की दहशत से शहीद स्मारक दुबारा नहीं बना सकी पुलिस

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ठोकिया ने मार गिराए थे पुलिस के 6 जवान 
23 जुलाई 2007 को पाठा के जंगल में डकैतों को मारकर वापस आ रही थी पुलिस 
बघोलन तिराहे का यह स्मारक आज भी वीरान है 
बाँदा / बदौसा - चित्रकूट मंडल के बीहड़ में कभी डकैतों का खौफ रहता था.बिना उनकी मर्जी के सरकारी विअक्स कार्य उनके इलाके में नहीं होते थे.हर ठेकेदार से चौथ वसूली करने वाले ये डकैत अपने -अपने गैंग के साथ गांववालों के लिए सरदर्द रहे है.यहाँ दस्यु शिवकुमार कुर्मी ददुआ से लेकर घनश्याम केवट,ठोकिया,बलखड़िया,डाक्टर,संग्राम सिंह और अब बबली कोल का दबदबा चलता है.लेकिन इन सबमें जो डकैती बादशाहत ददुआ ने कायम की वो कोई और नहीं कर पाया. 5 करोड़ रूपये एस डकैत को मारने में खर्च हुए उत्तर प्रदेश सरकार के और मरने तक उसका एक तस्वीर भी पुलिस के पास नही पहुंचा.कहते है ददुआ ने कभी गरीबों को सताया नहीं इसलिए गांववाले ही उसके राशन -पानी की व्यवस्था करते थे.इधर दस्यु सरगना बलखड़िया की मौत के बाद उसका भय पुलिस महकमे में शायद काबिज है.यही वजह है कि आधा दर्जन एसटीएफ के जवान जिस शहीद स्मारक में नाम के साथ दर्ज है उसको पुलिस दुबारा नहीं बनवा सकी है. बीते 21 सितम्बर को इसकी बरसी थी. गौरतलब है कि 23 जुलाई 2007 को पाठा के जंगल से कई डकैतों को मारकर वापस आ रहे पुलिस के जत्थे पर पहले से घात लगाये बैठे दस्यु सरगना ठोकिया और उसके साथियों ने एसटीएफ के आधा दर्जन जवान मार दिए.मृतक जवानों में इश्वर देव सिंह,राजेश सिंह चौहान,ब्रजेश यादव,लक्षमण प्रसाद,गिरीशचंद्र नागर और उमाशंकर थे.तभी गांववालों के चंदे से तत्कालीन एसपी बाँदा और वर्तमान डीआईजी ज्ञानेश्वर तिवारी ने 29 अक्तूबर 2012 को यह शहीद स्मारक बनवाया था.

                          शहीद स्मारक की फाइल तस्वीर अब यह बगैर पन्नी के है 
लेकिन इसके ठीक गयारह माह बाद 21 सितम्बर 2011 को दस्यु सरगना बलखड़िया ने दिनदहाड़े धावा बोलकर जेसीबी मशीन से स्मारक को उजाड़ दिया.बलखड़िया ने फरमान जारी किया गर दुबारा ये स्मारक बना तो फतेहगंज का थाना भी ढहा देंगे.पहले जो डकैत शहीद हुए है उनका भी स्मारक बनवाया जाये. फतेहगंज थाना अध्यक्ष अमर सिंह यादव कहते है कि जब से वे आये है यह ऐसे ही वीरान है.पहले पन्नी से ढका ये स्मारक अब खुले आसमान में अपने फिर से खड़े होने की आस में है मगर यह कौन करेगा ये तो डीआईजी ज्ञानेश्वर तिवारी ही बतला सकते है. उल्लेखनीय है कि चित्रकूट मंडल में डकैत का प्रवास अधिकतर पाठा -मानिकपुर और फतेहगंज ही रहा है ! लाखों रूपये के ये इनामी डकैत कभी पुलिस के लिए चुनौती रहे है.आज भी दस्यु सरगना ददुआ का दाहिना हाँथ राधे बाँदा जेल में बंद है !

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