Sunday, September 18, 2016

चार साल से लोकायुक्त के शिकंजे से बचे नसीमुद्दीन सुप्रीम कोर्ट के घेरे में !

www.pravasnamakhabar.com and www.bundelkhand.in
जगदीश नारायण शुक्ला संपादक निष्पक्ष प्रतिदिन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा नसीमुद्दीन सिद्दकी की 6 माह में जांचे पूरी करे यूपी सरकार ! #मनीष श्रीवास्तव
पिछले चार साल से समाजवादी मुखिया अखिलेश के बख्तरबंद में छिपे है माया के नसीमुद्दीन !
लखनऊ। नसीमुद्दीन सिद्दीकी, मायावती का सबसे अहम मोहरा कभी बसपा राज के दौरान मिनी मुख्यमंत्री के खिताब से नवाजा जाता था। इस दौरान नसीमुद्दीन को मायावती ने बतौर मंत्री 18 विभागों का दायित्व सौंपा। फिर क्या था नसीमुद्दीन ने हजारों करोड़ की खुली लूट को अंजाम दिया। नतीजतन स्मारक घोटाले से लेकर लैकफेड घोटाले समेत तमाम घोटालों में ये महाभ्रष्ट आज फंसा हुआ है लोकायुक्त तक ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी पाया। लेकिन यूपी सरकार मेहरबान साबित हुई और बजाय सीबीआई जांच कराने के,सिर्फ सतर्कता जांच के ही आदेश दिए। सतर्कता जांच भी बरसों से लम्बित है। लेकिन अब वरिष्ठ पत्रकार व निष्पक्ष प्रतिदिन के संपादक जगदीश नारायण शुक्ल की याचिका पर देश की शीर्ष न्यायपालिका ने यूपी के इस महाभ्रष्ट नेता पर अपना शिकंजा कस दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ यूपी सरकार को लताड़ लगाई बल्कि एक निश्चित समय सीमा के अंदर पूर्व भ्रष्ट मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी की जांच करने के आदेश सतर्कता अधिष्ठान व ईडी को दिए हैं। ऐसे में जल्द ही माया के इस अहम मोहरे को जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ सकता है। वरिष्ठ पत्रकार व निष्पक्ष प्रतिदिन के संपादक जगदीश नारायण शुक्ल ने सुप्रीम कोर्ट में पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ याचिका दायर कर मांग की है कि जब लोकायुक्त ने आय से अधिक संपत्ति मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति की थी तो सरकार ने सतर्कता जांच के आदेश क्यों दिए। इस महाभ्रष्ट की जांच सीबीआई और ईडी को करनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर व न्यायाधीश एएम खानविलकर की खण्डपीठ ने इस प्रकरण की सुनवाई करते समय शुक्रवार को बेहद सख्त रुख अपनाया।  मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने यूपी सरकार की धीमी जांच पर आपत्ति जताई। कहा, आखिर जांच का अंत होना चाहिए, आप तीन साल से मामले की जांच पूरी नहीं कर पा रहे हैं। आपके पास 1000 से ज्यादा पन्नों के दस्तावेज हैं। यदि आप एक पन्ना एक दिन में पढ़ते तो भी यह अब तक निपट जाना चाहिए था। कोर्ट ने तल्ख शब्दों में कहा कि क्या आप चुनावों का इंतजार कर रहे हैं। अगले साल राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों में पता नहीं किसके खिलाफ इस केस का इस्तेमाल किया किया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश की खण्डपीठ ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ लंबित सतर्कता जांच यूपी सरकार 6 महीने में पूरी करके रिपोर्ट सौपे। कोर्ट ने बसपा नेता सिद्दीकी  के  वकील से पूछा कि जांच में इतनी ढिलाई क्यों बरती जा रही है? कहीं आपकी मौजूदा सरकार के साथ दोस्ती तो नहीं हो गई है। वकील ने कहा कि यह संभव नहीं हैं क्योंकि वह उनके घोषित शत्रु हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि राजनीति में कोई स्थायी शत्रु नहीं होता, सिर्फ हित स्थायी होते हैं। याचिकाकर्ता जगदीश नारायण शुक्ला के वकील एमसी ढींगरा ने कहा कि मामले में पहले लोकायुक्त ने जांच की, फिर विजिलेंस से जांच कराई गई, लेकिन अभी पूरी नहीं हो सकी। कहा कि नसीमुद्दीन और उनकी पत्नी हुस्ना सिद्दीकी के खिलाफ लोकायुक्त ने तीन रिपोर्ट पेश की, जिनमें सीधे तौर पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, उनके पास चार हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति पाई गई है। जांच में देरी पर यूपी सरकार के वकील आरपी मेहरोत्रा ने सफाई देते हुए कहा कि इसके लिए प्रदेश के कई जिलों से दस्तावेज मंगाने पड़े, जिसके चलते देरी हो रही है।सिर्फ यही नहीं मनीलांड्रिंग के आरोपों पर भी सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से साफ कहा कि नसीमुद्दीन के खिलाफ पूरी जांच 6 महीने में तत्काल पूरी की जाए। मालूम हो कि पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी और उनकी एमएलसी पत्नी हुस्ना सिद्दीकी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की सतर्कता जांच बरसों से अधिष्ठान में पड़ी हुई है ये जांच एक इंच भी आगे नहीं बढ़ पा रही है। जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को कड़ी फटकार लगाई है वही ईडी भी नसीमुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ सिर्फ मनीलांड्रिंग का मुकदमा दर्ज कर हाथ पर हाथ धरे बैठ गया है। ये मुकदमा स्मारक घोटाले में दर्ज किया गया है।  जाहिर है अब नसीमुद्दीन सिद्दीकी की उलटी गिनती शुरू हो गयी है नसीमुद्दीन को बचाने के लिए  सुप्रीम कोर्ट में भी यूपी सरकार अपना जवाब गोलमोल तरीके से सिर्फ इसलिए दे रही है ताकि सतर्कता जांच को और लम्बे समय तक लटकाया जा सके।  घोटालों के मुखिया नसीमुद्दीन सिद्दीकी को सरकार बचाने में किस हद तक जुटी है इसका सीधा उदाहरण सुप्रीम कोर्ट को यूपी सरकार द्वारा पूर्व में  सौंपा गया जांच से सम्बन्धित हलफनामा है जिसमें कई चैकाने वाले खुलासे हैं जिससे यूपी सरकार का भी असली चेहरा बेनकाब हो गया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी स्टेटस रिपोर्ट में बेहद हास्यपद तरीके से कहा था  कि सतर्कता विभाग को अभी  नसीमुद्दीन  से प्राप्त प्रतिवेदनों समेत   1,000 से अधिक पृष्ठों के भूमि दस्तावेजों को जांचना रह गया है ये दस्तावेज बांदा लखनऊ और बाराबंकी समेत ज्योतिबाफुलेनगर में स्थित भूमि से सम्बन्धित है। इन जिलों के भू-राजस्व रिकाॅर्ड को सत्यापित करने के बाद ही सतर्कता जांच आगे बढ़ेगी लेकिन पिछले तीन वर्षों में अगर प्रतिदिन एक दस्तावेज भी सतर्कता अधिष्ठान ने पढ़ा होता तो ये सभी दस्तावेज जांचे जा चुके होते लेकिन सतर्कता सचिव व रिटायर्ड अफसर एसके रघुवंशी ने बसपाई एजेंट की भूमिका निभाते हुए ये हलफनामा सरकार की तरह से बनवा कर नसीमुद्दीन की जांच को दबाने का प्रयास किया था  क्योंकि सरकार ने स्मारक घोटाले के सम्बन्ध में भी जवाब सौपते हुए सुप्रीम कोर्ट को बताया था  कि स्मारकों और पार्कों की सतर्कता जांच के तहत  अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल, डा कांशीराम स्मारक स्थल, गौतम बुद्ध उपवन, इको पार्क और नोएडा के अंबेडकर पार्क की जांच सतर्कता अधिष्ठान कर रहा है लखनऊ और नोएडा के दलित स्मारकों की जांच बेहद तेज गति से की जा रही है ये झूठ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में नसीमुद्दीन के मामले में बोला था । यही नहीं मोदी सरकार के ऊपर मायावती भले दलितों पर हमले को लेकर निशाना साधे लेकिन अंदर से भाजपा और बसपा की मिलीभगत है। तभी नसीमुद्दीन और हुस्ना के क्यू एन्ड एफ ट्रस्ट पर ईडी ने कोई शिकंजा नहीं कसा जबकि पहले मनीलांड्रिंग का मुकदमा भी दर्ज हुआ था। इसी ट्रस्ट के जरिये जमकर मनीलांड्रिंग को अंजाम दिया गया है। लोकायुक्त ने उस वक्त रही मुख्यमंत्री मायावती को शर्मसार करते हुए सिद्दीकी और हुसना के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जांच बैठाने की सलाह दी थी। लोकायुक्त ने बताया था कि आय के स्रोतों से अधिक कीमत की संपत्तियों के होने की वजह से दोनों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय द्वाराजांच बैठाने की सलाह दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार सिद्दीकी की सम्पति से पता लगता है कि ये काले धन को वैध बनाने का मामला है जिसकी जांच अपराध जांच एजेंसी करेगी। लोकायुक्त ने ये भी बताया कि दर्ज की गई शिकायत के अनुसार हुस्ना सिद्दीकी ने आय के अवैध स्रोतों से एजुकेशनल सोसाइटी की खोज की। वहीं बुंदेलखंड एरिया डेवेलपमेंट फंड एजुकेशनल सोसाइटी में अनियमितताओं के जरिए काला धन पैदा किया और भूमि भी खरीदी। जांच में इस बात का खुलासा हुआ है। क्यू एंड एफ सोसाएटी को सिर्फ काले धन के लिए कागजों पर ही चलाया जा रहा है। ऐसे में अब ईडी की जांच भी दफन करा दी गयी है !

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

Links to this post:

Create a Link

<< Home